Directorate of Training & Employment (Training Wing)

Labour Department, Government of Uttar Pradesh

Introduction

Introduction

दूसरे विश्व युद्ध की तकनीकी मानव शक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये युद्धकाल तकनीकी योजना का आरम्भ वर्ष 1946 में हुआ। युद्ध की समाप्ति के पश्चात् योजना में आवश्यक संशोधन करने के उपरान्त विमुक्त सैनिकों को प्रशिक्षित करने तथा पुर्नवास करने की योजना बनायी गयी। वर्ष 1947 में स्वतंत्रायोत्तर काल में देश के विभाजन के परिणामस्वरूप विस्थापितों को भी पुनर्वासित करने हेतु इस प्रशिक्षण योजना का उपयोग किया गया, जिसके फलस्वरूप प्रशिक्षण योजना के आकार में पर्याप्त वृद्धि हुई। शिवाराव की अध्यक्षता में गठित शिवाराव समिति की संस्तुतियों पर 1956 में इस योजना का प्रशासन केन्द्रीय सरकार द्वारा राज्य सरकार को स्थानान्तरित कर दिया गया। राज्य में स्थापित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का संचालन पूर्व में श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराया जाता था। तदोपरान्त वर्ष 2007 में व्यावसायिक शिक्षा के महत्व के दृष्टिगत शासन स्तर पर एक अलग विभाग व्यावसायिक शिक्षा के नाम से गठित किया गया जिसका वर्तमान नाम व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग कर दिया गया है। इसके अन्तर्गत एक ओर प्रदेश के राजकीय एवं निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का संचालन कराया जाता है तथा दूसरी ओर कौशल विकास मिशन का संचालन कराया जा रहा है। प्रदेश में औद्योगिक अधिष्ठानों एवं उद्योगों की बढ़ती हुई मानव शक्ति की माँग की पूर्ति हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण की सुविधाओं में प्रसार किया गया है। वर्तमान में प्रदेष में 217 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हैं जिनमें 60,240 सीटें प्रशिक्षण हेतु उपलब्ध हैं। इनके अतिरिक्त प्रदेश में 1,428 निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हैं जिनमें 1,69,586 सीटें प्रशिक्षण हेतु उपलब्ध हैं। कौशल विकास मिशन के अन्तर्गत रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय, भारत सरकार की स्किल डेवलपमेन्ट इनीशिएटिव योजना तथा अन्य रोजगारपरक व्यावसायिक कौशलों में प्रशिक्षण प्रदान कराया जा रहा है।